लखनऊ-बेमौसम बरसात से किसानों, बागवानों के चेहरों पर छायी मायूसी

गेहूं, सरसों, मटर आदि फसलों को पहुंचा भारी नुकसानमलिहाबाद-लखनऊ। करोना वायरस की मार झेल रहे किसानों व बागवानों परबेमौसम हुयी बरसात मानों जहर बनकर बरसी है। किसानों व बागवानों के समक्षअब पूरे वर्ष के भरण पोषण का भी खतरा मडराने लगा है।    शुक्रवार सुबह से हो रही रूक-रूककर बरसात ने तो किसानों व बागवानोंकी पूरी तरह कमर तोड़ दी है। इस फलपट्टी क्षेत्र मे करीब 70 प्रतिशतभू-भाग पर आम के बाग लहलहा रहे है। शेष बची भूमि पर किसान खेती किसानी करअपने पूरे वर्ष का अन्न उत्पन्न करते हैं। इस समय खेतों मे खड़ी गेहूं,सरसों की फसल पक चुकी है। जिसकी कटायी होनी थी लेकिन बेमौसम हुयी इसबरसात ने खेतों मे खड़ी गेहूं, सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है।अधिकतर खेतों मे गेहूं की खडी फसल पूरी तरह पक चुकी है। कुछ खेतों मेकिसानों ने इसकी कटायी भी करना शुरू कर दी है। लेकिन बेमौसम हुयी बरसातसे गेहूं के दाने  जमीन मे गिर गये है। मलिहाबाद फलपट्टीक्षेत्र माल, काकोरी, रहीमाबाद मलिहाबाद के 70 प्रतिशत भू-भाग पर आम कीफसल होती है। इस वर्ष 70 प्रतिशत बागों मे बौर आया है। मार्च माह मे हुयीओलावृष्टि से आम फसल को करीब 20 प्रतिशत नुकसान हो गया था। जिससे आमबागवानों के चेहरों पर चिन्ता की लकीरें खिंच गयी थीं। चिन्ता की लकींरेखिंचने का मुख्य कारण था कि यहां की मुख्य फसल आम है। मार्च के अन्तिमसप्ताह मे बौर फूलने के साथ फल बैठना शुरू हो जाता है। शुक्रवार हुईबेमौसम बरसात से आम बागवानों की चिन्ता बढ़ा दी है। बरसात होने से आम केबागों मे गुजिया, फफूंदी, खर्रा आदि रोगों का प्रकोप अधिक बढ़ जाताहै। यह रोग बौर को चूंसकर काला कर पूरी तरह नष्ट कर देता है। आम बागवानअनिल व मोहसिन खां का कहना है कि मौसम ने करवट नहीं ली तो आम फसल क्षेत्रमे नाम मात्र की बचेगी जिससे पूरे वर्ष का खर्च चलाना तो दूर कीटनाशकदवा का भी पैसा आना मुश्किल हो जायेगा।    बागवानों व किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।विगत एक सप्ताह से करोना वायरस के चलते घरों मे ही लोग रहने को मजबूरहैं। पूरे भारत देश मे 22 मार्च से हुये लाॅकडाउन के बाद तो लोगों का घरसे निकलना पूर्ण रूप से बन्द हो गया है। आवश्यक कार्यों के लिये ही पुलिसप्रशासन ने लोगों को निकलने की छूट दे रखी है। बेवजह बाहर घूमने वालेलोगों को घरों मे रहने की सलाह दे रही है। जिससे दैनिक मजदूरों, मध्यमवर्ग के लोगों व झुग्गी झोपड़ियो मे रहने वाले लोगों को काफी परेशानियोंका सामना करना पड़ रहा है। उनके आगे अब अपने परिवार के भरण पोषण की समस्याभी उत्पन्न होने लगी है।