मध्यप्रदेश सरकार के 100 दिन के महत्वपूर्ण फैसले


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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद का चौथी बार 23 मार्च, 2020 को कार्यभार संभाला। उनके लंबे प्रशासनिक और राजनैतिक अनुभव का लाभ मध्यप्रदेश को मिला है। वर्ष 2005 में पहली बार, 2008 में दूसरी बार, 2013 में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद वर्ष 2020 में जिन कोरोना काल की परिस्थितियों में श्री चौहान ने पदभार संभाला, वह किसी सरकार के लिए अनुकूल नहीं मानी जा सकतीं। सदैव चुनौतियों के बीच पूरी ऊर्जा और कार्य क्षमता में वृद्धि कर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विद्यमान समस्याओं का सामना किया है। श्री चौहान ने जनता के कल्याण की नई-नई योजनाएं प्रारंभ कीं जिनका लाभ विभिन्न वर्गों को सीधे प्राप्त हुआ। आज भी प्रदेश की जनता इन योजनाओं का फायदा ले रही है। मार्च, 2020 में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जब पदभार संभाला तब कोविड-19 का संकट दिनों दिन विकराल रूप धारण करता जा रहा था। वायरस की टेस्टिंग और उपचार के कोई प्रबंध ही नहीं थे। वहीं आमजन के कल्याण की योजनाओं के लिए राशि के आवंटन का कार्य भी लगभग थम सा गया था।


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पद की जिम्मेदारी संभालते ही पहले दिन से दिन-रात कार्य करते हुए व्यवस्थाएँ जमाईं। आज प्रत्येक जिले में सामान्य बेड, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन बेड के साथ उपचार की सुविधा उपलब्ध है। हर घर तक जाकर स्वास्थ्य दल लोगों की स्वास्थ्य जाँच कर रहे हैं।


मध्यप्रदेश बहुत से अन्य प्रदेशों से कोरोना नियंत्रण में आगे इसलिए निकला क्योंकि प्रदेश में आईआईटीटी रणनीति के तहत लगातार कार्य किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने करीब सवा दो सौ घण्टे की वीडियो कॉन्फ्रेंस और बैठकें करके कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए पूरी ताकत लगा दी। सतत् समीक्षा से व्यवस्थाएँ बेहतर करना संभव हुआ और आमजन स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जीने की स्थिति में पहुँचा। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का रिकवरी रेट 80 प्रतिशत तक पहुँच गया है। यही नहीं संक्रमण की रफ्तार पर अंकुश लगाने में मध्यप्रदेश सबसे आगे है।


प्रदेश की आर्थिक प्रगति और विभिन्न वर्गों तक योजनाओं की राशि पहुँचाने के लिए प्रदेश में विकसित ऑनलाईन व्यवस्था से बड़ा सहारा मिला। चाहे प्रवासी श्रमिकों को आर्थिक सहायता देने की बात हो या विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का भुगतान, सभी के खाते में यथा समय राशि पहुँचाने का कार्य किया गया है। सबसे बड़ी राहत तो प्रदेश के उन सोलह लाख किसानों को मिली जिन्हें करीब 24 हजार करोड़ रुपये की राशि मेहनत से उगाये गये गेहूँ के उपार्जन के फलस्वरूप प्राप्त हुई।


सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि प्रदेश में गत तीन माह में नागरिकों को कोविड-19 के संक्रमण से बचाकर विकास के कई आयाम छुए गए हैं। किसानों से गेहूँ खरीदी के साथ ही विभिन्न योजनाओं की राशि हितग्राहियों के खाते में समय पर जमा करवाने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।


मुख्यमंत्री श्री चौहान के सौ दिन के इस कार्यकाल के महत्वपूर्ण फैसलों की बात की जाये तो सबसे अहम कोरोना के संकट में विभिन्न तबकों को आर्थिक सहायता पहुँचाना है जिससे उनकी रोजमर्रा के जीवन की कठिनाईर्याँ दूर हो सकीं। कल्याणकारी सरकार ने यदि समय पर ये फैसले न लिये होते तो नागरिक आज काफी मुश्किल स्थिति में जीवन जीने को विवश हो जाते। मध्यप्रदेश के किसान, मजदूर, आदिवासी, विद्यार्थी और महिला वर्ग आज सरकार से मिली मदद के कारण कोरोना का दुख भूलकर चेहरे पर स्वाभाविक मुस्कान लाने में सफल हुए है।


मेहनतकश किसानों को दी गई गेहूँ उपार्जन राशि और अन्य योजनाओं में किसानों को दी गई सहायता-




  • मध्यप्रदेश प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्य है। प्रदेश में रिकार्ड गेहूँ उपार्जन हुआ। करीब 24 हजार करोड़ रुपये की राशि लगभग 16 लाख किसानों के खाते में पहुँचायी गई।




  • मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पदभार ग्रहण करते ही प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिए खरीदी केन्द्रों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया। पहले 3511 केन्द्र थे, जो बढ़ाकर लगभग साढ़े चार हजार किए गए। प्रदेश में एक करोड़ 29 लाख 34 हजार 500 मीट्रिक टन गेहूँ उपार्जित।




  • शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को ऋण देने का निर्णय। योजना की अवधि




  • 2019-2020 में निरंतर रखते हुए 2020-21 तक बढ़ाई गई।




  • प्रदेश में 29 अप्रैल से गेहूँ, चना, सरसों का उपार्जन प्रारंभ करने का निर्णय। चने में दो प्रतिशत, तिवड़ा होने पर भी समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए भारत सरकार से मंजूरी प्राप्त की गई। इसका तत्काल ही क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया।




  • चना, मसूर और सरसों के लिए उपार्जन केन्द्र बढ़ाने का निर्णय। गत वर्ष के 776 केन्द्रों की तुलना में इस वर्ष 896 केन्द्र बनाए गए।




  • अल्पकालीन फसल ऋण की देय तिथि में वृद्धि का निर्णय। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा खरीफ 2019 और रबी सीजन 2019-20 में बाँटे जाने वाले ऋण के लिए 31 मई के स्थान पर 31 अगस्त अंतिम तिथि होगी। किसानों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा शून्य प्रतिशत ब्याज दर योजना का लाभ सभी किसानों को मिले, इस दृष्टि से यह निर्णय लिया गया।




  • कृषि उपज मण्डी अधिनियम 1972 में संशोधन का निर्णय। अब राज्य में निजी मण्डियों की स्थापना संभव। पूरे प्रदेश में एक ही व्यापारी लायसेंस की व्यवस्था और ई-ट्रेडिंग का प्रावधान।




  • किसानों को उपार्जन केन्द्र के साथ ही मण्डी के अधिकृत निजी खरीद केन्द्र और सौदा पत्रक व्यवस्था में व्यापारी को सीधे फसल बेचने का विकल्प उपलब्ध कराने का निर्णय।




  • चना, मसूर और सरसों की प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन अधिकतम उपार्जन सीमा 40 क्विंटल थी, जिसे समाप्त करने का निर्णय लिया गया।




  • फसल बीमा योजना में किसानों को वर्ष 2018-19 के खरीफ और रबी फसलों के प्रीमियम के 2200 करोड़ रूपए देने का निर्णय। इसके फलस्वरूप 2990 करोड़ रूपए का बीमा राशि का भुगतान किसानों को संभव हुआ। मार्च माह में ही बीमा कंपनियों को प्रीमियम राशि दे दिए जाने से किसानों का हित सुनिश्चित हो सका।




  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान-निधि योजना में प्रति हितग्राही 2000 रूपये की राशि किसानों के खातों में पहुँचाई गई।




श्रमिकों को दी गई सहायता-




  • अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश लौटने वाले श्रमिकों और अन्य राज्यों के मध्यप्रदेश से होकर अपने मूल प्रदेश जाने वाले श्रमिकों के लिए जिलों में रहवास और भोजन की निशुल्क व्यवस्था का निर्णय।




  • दूसरे राज्यों के पैदल या अन्य साधन से मध्यप्रदेश पहुंचने वाले श्रमिकों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाकर सीमावर्ती राज्यों की सीमा तक पहुंचाने का निर्णय।




  • मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना में श्रमिकों का पंजीयन करने का निर्णय। एक मार्च 2020 या उसके पश्चात अन्य राज्यों से लौटे ऐसे श्रमिक जो मध्यप्रदेश के मूल निवासी हैं उन्हें संनिर्माण मंडल में पंजीयन की पात्रता और सुविधा प्रदान की गई। समग्र पोर्टल पर आई.डी. जनरेट कर सत्यापन का कार्य भी सम्पन्न।




  • प्रदेश में लौटे श्रमिकों को मनरेगा के अंतर्गत श्रम सिद्धि अभियान में रोजगार प्रदान करने का निर्णय। इन श्रमिकों को जॉब कार्ड भी उपलब्ध करवाए गए।




  • रोजगार सेतु पोर्टल के माध्यम से बाहर से आए श्रमिकों की योग्यता के अनुसार विभिन्न संस्थानों में रोजगार उपलब्ध करवाने का निर्णय। इन श्रमिकों का पंजीयन कर दस्तावेजीकरण कार्य सम्पन्न। पंजीकृत श्रमिकों के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का निर्णय।




  • प्रवासी श्रमिकों के कल्याण के लिएप्रवासी मजदूर आयोग गठित करने का निर्णय।




  • शहरी पथ व्यवसायी उत्थान योजना और शहरी पथ विक्रेता पोर्टल प्रारंभ करने का निर्णय। इस योजना में बिना ब्याज के 10 हजार रूपये तक का ऋण उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाएगा। करीब 4 लाख पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेण्डर्स) के लिए राशि का प्रावधान भी किया गया।




  • मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में वर्ष 2020-2021 में 30 हजार लोगों को लाभान्वित करने का निर्णय। सब्सिडी के लिए बजट में 45.85 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया।




  • शहरी असंगठित कामगार एकीकृत पोर्टल में एकजाई जानकारी रखने की व्यवस्था। सूक्ष्म ऋण के लिए प्रकरणों का चयन कर लाभांवित करने का निर्णय। अब तक 8 लाख से अधिक पथ व्यवसायियों का पंजीयन कार्य पूर्ण।




  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान में केन्द्र सरकार द्वारा सालाना 125 दिन के रोजगार दिए जाने के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के 24 जिले चयनित करने का निर्णय।




  • प्रदेश के श्रम कानूनों में ऐसे संशोधन किए गए जिससे श्रमिकों को अधिक आर्थिक लाभ मिले। इस महत्वपूर्ण निर्णय के तहत कारखानों में मजदूरों के कार्य की दैनिक अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की गई। श्रमिकों को ओवरटाइम से आय बढ़ाने का अवसर दिया गया।




आम विद्युत उपभोक्ताओं को दी गई सहायता-




  • मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विद्युत उपभोक्ताओं को संदेश भेजकर सरकार द्वारा बिजली के बिलों में राहत के निर्णय की जानकारी दी। इस निर्णय के अंतर्गत प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत अधिभार माफ किया है। अप्रैल 2020 की स्थिति में जारी विद्युत देयकों की भुगतान तिथि मई तक बढ़ाई गई। ऐसे देयकों के भुगतान पर विलंब के लिए लगने वाला अधिभार माफ किया गया। इस निर्णय से 21 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत। ऐसे उपभोक्ता जिन्होंने अप्रैल और मई में देयक राशि का नियत तिथि तक भुगतान किया है, उन्हें एक प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि आगामी देयक में प्रदान करने का निर्णय। प्रदेश में ऐसे 1.61 करोड़ उपभोक्ता हैं। संबल योजना के हितग्राही, जिनकी अप्रैल 2020 में 100 रूपये तक विद्युत देयक की राशि है उन्हें तीन महीनों मई, जून और जुलाई में 100 रूपये तक बिल आने पर सिर्फ 50 रूपये का भुगतान ही करना होगा। इस श्रेणी में 30.68 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को 46 करोड़ रूपए की छूट राशि का लाभ। ऐसे घरेलू उपभोक्ता जिनके अप्रैल 2020 में 400 रूपये तक विद्युत देयक आए हैं उन्हें तीन महीनों अर्थात मई,जून एवं जुलाई में 100 रूपये प्रतिमाह ही देने होंगे। इस श्रेणी में 56 लाख उपभोक्ताओं के लिए 255 करोड़ रूपए की राहत का प्रावधान किया गया। इसी तरह 400 रूपये से अधिक विद्युत देयक वाले उपभोक्ताओं को बिल की आधी राशि ही देनी होगी। शेष आधी राशि का फैसला बिल की जाँच के बाद किया जाएगा। इस श्रेणी के 7.71 लाख विद्युत उपभोक्तओं को 183 करोड़ रूपये की राहत मिल रही है। सभी श्रेणियों के लाभान्वित उपभोक्ताओं की संख्या 95 लाख और छूट राशि 623 करोड़ रूपए है।




  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पात्र परिवारों को एक महीने का निःशुल्क राशन देने का निर्णय लिया गया।




  • प्रदेश के ऐसे परिवार जिनके पास राशन कार्ड नहीं है लेकिन वे निर्धन वर्ग से हैं उन्हें विभिन्न 25 श्रेणियों में अतिरिक्त खाद्यान उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया। कोविड-19 के कारण संकट में आए परिवारों को इस निर्णय से बड़ी राहत मिली है।




  • राशन कार्ड धारियों को भारत सरकार के पैकेज अनुसार 3 माह तक प्रति व्यक्ति 5 किलो खाद्यान एवं प्रति माह प्रति परिवार एक किलो दाल का निःशुल्क वितरण करने का निर्णय लिया गया।




  • प्रदेश में रूके अन्य राज्यों के श्रमिकों को भी आत्मनिर्भर भारत योजना में मई और जून माह के लिए पांच किलो गेहूँ और एक किलो दाल प्रदान करने का निर्णय लिया गया।




  • भारत सरकार की वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना की प्रदेश के पात्र परिवारों के साथ ही अन्य राज्यों के मध्यप्रदेश में रूके परिवारों को भी खाद्यान उपलब्ध कराने का निर्णय लेकर वितरण प्रारंभ किया गया।




  • प्रदेश में अधिवक्ता सहायता योजनाकोष की राशि दो करोड़ रूपये करने का निर्णय।




  • प्रदेश के नागरिकों के लिए सम्पत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि में वृद्धि का निर्णय। प्रदेश में सम्पत्ति के क्रय-विक्रय की नई गाइडलाइन 1 मई से लागू करने का निर्णय।




  • प्रदेश में कोरोना संकट काल में नागरिकों के मन में भय और अवसाद को दूर करने के लिए राज्य आनंद संस्थान द्वारा ऑनलाइन अल्पविराम कार्यक्रम के संचालन का निर्णय।




महिलाओं को प्रदत्त आर्थिक सहायता




  • जीवन शक्ति योजना के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों को मास्क निर्माण के कार्य से जोड़ा गया। नगरीय क्षेत्र की महिलाओं के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्रति मास्क 11 रूपये का मानदेय देने का निर्णय। इस योजना को कोविड-19 में काफी लोकप्रियता भी मिली। प्रत्येक नागरिक को मास्क के अनिवार्य उपयोग के कारण स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित एक करोड़ से अधिक मास्क का विक्रय किया गया। महिला समूहों को राशि का भुगतान सुनिश्चित किया गया।




  • नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश की महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय स्कूलों के गणवेश बनाने का दायित्व सौंपने का निर्णय।




  • आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए पोषण आहार तैयार करने और प्रदाय करने का जिम्मा भी महिला स्व-सहायता समूहों को देने का फैसला।




  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य से 6 जिलों में 16 गेहूँ उपार्जन केन्द्रों पर गेहूँ खरीदी कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने का निर्णय। इस निर्णय के फलस्वरूप महिला स्व-सहायता समूहों ने करीब सवा दो हजार किसानों से एक लाख क्विंटल से अधिक गेहूँ की खरीद की। गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला प्रदेश बना।




  • प्रदेश की एक करोड़ 66 लाख महिलाओं के जनधन खातों में 500-500 रूपये की राशि जमा करने का निर्णय।




  • महिला सशक्तिकरण की दिशा में निष्ठा विद्युत मित्र योजना प्रारंभ करने का निर्णय। यह योजना भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभागों के 16 जिलों की ग्राम पंचायतों में लागू। योजना में ग्राम पंचायत स्तर के उपभोक्ताओं और विद्युत वितरण कंपनी के मध्य सेतु की तरह निष्ठा विद्युत मित्र सेवक के रूप में कार्य करेंगी। ग्राम पंचायत स्तर पर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं यह दायित्व निभाएंगी। त्रुटिपूर्ण विद्युत देयकों की शिकायतों के निराकरण, उपभोक्ताओं के बंद और खराब विद्युत मीटरों की शिकायतों को हल करने, नए कनेक्शन प्रदान करने, और विद्युत के अवैध उपयोग की रोकथाम का कार्य भी योजना के अंतर्गत किया जाएगा।




  • महिला स्व-सहायता समूहों को कम से कम ब्याज दर पर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए बैंक ऋण उपलब्ध करवाने की योजना प्रारंभ करने का निर्णय।




  • प्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों पर महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी टीकाकरण और पोषण आहार वितरण का कार्य करने का निर्णय। कोविड-19 की गतिविधियों के संचालन से प्रदेश के समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों को मुक्त रखने का निर्णय।




सामाजिक सुरक्षा पेंशनविधवा और वृद्धावस्था पेंशन की राशि




  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत करीब 47 लाख हितग्राहियों को 562 करोड़ रूपए की राशि के भुगतान का निर्णय।




  • सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में सभी श्रेणी के पेंशनधारियों को दो माह की राशि अग्रिम देने का निर्णय।




अधिकारियों-कर्मचारियों और कोरोना योद्धाओं के लिए प्रावधान




  • मुख्यमंत्री कोरोना योद्धा कल्याण योजना प्रारंभ करने का निर्णय। कोरोना के नियंत्रण में लगे किसी भी अधिकारी-कर्मचारी के साथ अनहोनी होने पर राज्य सरकार 50 लाख रूपये की सहायता राशि प्रदान करेगी।




  • कोविड-19 में दायित्व निभाने वाले पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए जीवन गंवा देने पर कर्मवीर सम्मान और पदक देने का निर्णय लिया गया।




  • कोरोना संक्रमण से बचाव में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मी और चिकित्सकीय स्टाफ सम्मानित किये जाएंगे।




  • कोविड-19 के विरूद्ध अभियान के दृष्टिगत प्रदेश के शासकीय विभागों, उन विभागों के अंतर्गत गठित निगम, मंडल और सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों में 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हुए शासकीय सेवकों को 3 माह की संविदा नियुक्ति देने का निर्णय। यह आदेश 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी नियत प्रक्रिया अनुसार लागू होगा।




  • खेल विभाग में कार्य कर रहे 540 तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के संविदा कर्मियों को 90 प्रतिशत मानदेय दिए जाने का निर्णय। इस निर्णय से संविदाकर्मियों के मानदेय में 5 से 15 हजार रूपए का इजाफा हुआ है।




  • पुलिसकर्मियों को उच्चतम वेतनमान का पदनाम देने का निर्णय।




  • पुलिस विभाग में 4269 पुलिस आरक्षकों की भर्ती का निर्णय।




  • होमगार्ड सैनिकों की एक जून, 2020 से आगामी 6 माह के लिए बाध्यकाल ऑफ अवधि स्थगित करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से एक हजार होमगार्ड सैनिकों को एक जून से अगले 6 माह तक निरंतर कार्य करने की सुविधा मिलेगी।




  • प्रदेश में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के अंतर्गत अतिथि विद्वानों को लॉकडाउन अवधि का मानदेय देने का निर्णय।




विशेष पिछड़ी जनजातियों और वनवासियों को दी गई सहायता




  • प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजाति सहरिया, बैगा और भारिया के खातों में एक-एक हजार रूपए की सहायता राशि जमा कराने का निर्णय।




  • तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए पत्ते की तुड़ाई और संग्रहण के कार्य को प्रारंभ कर 2500 रूपये प्रति मानक बोरे की दर से पारिश्रमिक देने का निर्णय।




  • अन्य लघु वनोपज के विक्रय के लिए गत वर्ष की तुलना में क्रय दरें बढ़ाकर आदेश जारी किए गए। मूल्य में 19 से 53 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई। इसके अनुसार अचार-गुठली के लिए 130 रूपये प्रति किलो, पलाश-लाख 150 रूपये प्रति किलो, कुसुम-लाख 230 रूपये प्रति किलो, हर्रा 20 रूपये प्रति किलो, बहेड़ा 25 रूपये प्रति किलो, बेल गूदा 30 रूपये प्रति किलो, चकोड बीज 20 रूपये प्रति किलो, शहद 225 रूपये प्रति किलो, महुआ फूल 35 रूपये प्रति किलो, महुआ बीज 35 रूपये प्रति किलो, करंज बीज 40 रूपये प्रति किलो, नीम बीज 30 रूपये प्रति किलो, साल बीज 20 रूपये प्रति किलो, नागरमोथा 35 रूपये प्रति किलो किया गया।




  • ऐसे आदिवासी जो 31 दिसम्बर 2005 को या उससे पहले से भूमि पर काबिज है, उन्हें अनिवार्य रूप से भूमि का पट्टा देने का निर्णय।




  • आदिवासी अंचलों में आदिवासी पंचायतें आयोजित करने का निर्णय। शीघ्र ही पंचायतों के आयोजन का शेड्यूल निर्धारित किया जाएगा। इन पंचायतों में आदिवासियों को वनाधिकार पट्टों का वितरण किया जाएगा।




विद्यार्थियों को प्रदान की गई सहायता




  • प्रदेश की शासकीय प्राथमिक शालाओं और शासकीय माध्यमिक शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के खाते में मध्यान्ह भोजन योजना की राशि जमा करने का निर्णय। कुल 165 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान।




  • प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में फीस जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2020 तक बढ़ाने का निर्णय।




  • विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत 430 करोड़ की राशि छात्र-छात्राओं के खातों में जमा कराने का निर्णय। इस निर्णय से छात्र-छात्राओं को कोविड-19 के संकट में राहत प्रदान।




  • मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10वीं एवं 12वीं के जिन विषयों की परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी है, उनकी परीक्षा लॉकडाउन के बाद आयोजित करने का निर्णय।




  • माध्यमिक शिक्षा मंडल से सम्बद्ध ऐसे सभी निजी हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी स्कूल, जिनकी मान्यता 31 मार्च 2020 को समाप्त हो गयी है, को इस वर्ष मान्यता नवीनीकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत करने से छूट प्रदान की गयी है और विद्यालय की मान्यता को एक साल के लिए 31 मार्च 2021 तक यथावत मान्य करने का निर्णय। मान्यता नवीनीकरण के शुल्क भी आगामी सत्र तक के लिए स्थगित है। भविष्य में मान्यता नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ होने पर उक्त शुल्क जमा कराया जा सकेगा।




  • सत्र 2020-21 के लिए नवीन मान्यता के लिए आवेदन पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2020 से बढ़ाकर 30 मई 2020 करने का निर्णय।




  • कक्षा 1 से 11 तक सभी विद्यार्थियों को इस वर्ष जनरल प्रमोशन देने का निर्णय।




  • प्रदेश के सभी स्कूलों में 31 जुलाई 2020 तक के लिए अवकाश घोषित करने का निर्णय।




  • प्रदेश में लॉकडाउन के चलते स्कूल एवं कॉलेज बंद होने के फलस्वरूप सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में ऑनलाइन माध्यमों से अध्ययन एवं अध्यापन कार्य कराने का निर्णय ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हों। स्कूल शिक्षा विभाग ने 11 मई 2020 से दूरदर्शन पर विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम ‘‘क्लास रूम’’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया।




  • ई-बुलेटिन ‘‘अब पढ़ाई नहीं रूकेगी’’प्रारंभ करने का निर्णय।




  • ऐसे अभिभावक, जो स्कूल का गत सत्र 2019-20 का बकाया शुल्क जमा नहीं कर पाये हैं, उन्हें उक्त शुल्क 30 जून 2020 तक जमा करने पर किसी प्रकार का विलम्ब शुल्क नहीं लगेगा।




  • वर्तमान शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए आगामी आदेश तक निजी विद्यालयों द्वारा कोई शुल्क वृद्धि नहीं की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त पालकों को एकमुश्त फीस जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। निजी विद्यालय पालकों की सुविधा अनुसार मासिक रूप से अथवा न्यूनतम 04 किश्तों में फीस ले सकेंगे। फीस जमा नहीं किये जाने के कारण किसी भी विद्यार्थी का स्कूल से नाम नहीं काटा जा सकेगा। विद्यार्थियों से ऑनलाइन पढ़ाई की अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी।




  • समस्त निजी विद्यालयों को उनके शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ का वेतन नियमित रूप से भुगतान किये जाने का निर्णय।




  • एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली लागू करने का निर्णय। इससे प्रदेश के 21 शासकीय विश्वविद्यालयों के लगभग 24 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। विद्यार्थियों को इलेक्ट्रानिक फार्मेट में डिजिटल हस्ताक्षरित डिग्री और मार्कशीट प्राप्त होगी। मार्कशीट और डिग्री अब पेपर पर नहीं दी जायेगी। छात्रों को ऑनलाइन पाठ्यक्रम, परीक्षा और परिणाम प्राप्त होंगे। प्रदेश के समस्त पुस्तकालयों की सुविधा ऑनलाइन प्राप्त होगी। छात्रों को प्लेसमेंट संबंधी जानकारी सुलभ होगी। आवासीय और भोजन व्यवस्था और शुल्क संबंधी जानकारी के साथ-साथ फीस आदि भी ऑनलाइन जमा की जा सकेगी। ऑनलाइन पाठ्यक्रम सुलभ होगा तथा इस पेपरलेस व्यवस्था से आर्थिक बचत के साथ-साथ फिजीकली डिस्टेंसिंग का पालन भी होगा।




  • माध्यमिक शिक्षा मण्डल के कक्षा 10वीं की परीक्षा के शेष बचे पेपर की परीक्षा नहीं ली जायेगी। जिन विषयों की परीक्षा हो चुकी है, उन्हीं के अंक के आधार पर मैरिट तैयार की जायेगी। बचे हुए विषय के आगे ‘पास’ लिखा जायेगा।




  • बारहवीं की परीक्षा के जो पेपर बचे हुए हैं, उनकी परीक्षा 8 जून 2020 से 16 जून 2020 के मध्य आयोजित करने का निर्णय।




  • निजी स्कूल के विद्यार्थियों से केवल ट्यूशन फीस ले सकेंगे। प्रदेश में 19 मार्च से लॉकडाउन रहने के कारण लॉकडाउन समाप्त होने की अवधि तक निजी विद्यालय बंद रहे हैं, इसलिए वे ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं ले सकेंगे।




  • उच्च शिक्षा की स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं और पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाएं 29 जून से 31 जुलाई 2020 के मध्य आयोजित की जाएगी। यह व्यवस्था सभी निजी विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों पर भी लागू होगी। उच्च शिक्षा की प्रथम, द्वितीय वर्ष की कक्षाओं/पाठ्यक्रमों की नियमित परीक्षाएं स्थिति सामान्य होने पर आयोजित की जायेंगी। स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं और पाठ्यक्रमों के फाइनल इयर/सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑफ लाइन मोड में परीक्षा केन्द्रों पर होगी। स्नातकोत्तर कक्षाओं के पूर्वार्द्ध और स्नातक कक्षाओं और पाठ्यक्रमों के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष/सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में एक सितम्बर, 2020 से नये सत्र में प्रवेश दिया जाएगा।




  • इस वर्ष स्नातकोत्तर पूर्वार्द्ध और स्नातक कक्षाओं/पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष/सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का नया सत्र एक अक्टूबर 2020 से शुरू होगा।




  • राजीव गांधी प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाएं 16 से 30 जून, 2020 के बीच संपन्न। अंतिम वर्ष की कक्षाओं/पाठ्यक्रमों की परीक्षा पारम्परिक प्रणाली से होगी। इनके परिणाम 15 जुलाई, 2020 तक घोषित होंगे।




  • विश्वविद्यालय प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की कक्षाओं/सेमेस्टर के छात्रों की परीक्षाएं ऑफलाइन पेन-पेपर मोड के माध्यम से दिनांक 2 जुलाई से 31 जुलाई 2020 के मध्य आयोजित होंगी। इसके परीक्षा परिणाम 25 अगस्त, 2020 तक घोषित होंगे। यदि कोई परीक्षार्थी अपरिहार्य कारणों से परीक्षा में उपस्थित नहीं हो पाता है तो उसके लिये पृथक से विशेष परीक्षा होगी।




  • लॉकडाउन की अवधि में संभावित लर्निंग लॉस को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने डिजिटल लर्निंग के विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किये।




  • प्रदेश के सभी शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों की स्नातक अंतिम वर्ष तथा स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की कक्षाओं की परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित होंगी। स्नातक प्रथम, द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर और अन्य पाठ्यक्रमों की नियमित परीक्षाएं स्थानीय स्तर पर परिस्थितियां सामान्य होने पर आयोजित की जा सकेंगी। स्नातक कक्षाओं के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष सेमेस्टर एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के द्वितीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रवेश देकर एक सितम्बर 2020 से नया सत्र प्रारंभ किया जाएगा। इस वर्ष के लिए स्नातक कक्षाओं और पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष तथा स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का नया सत्र 01 अक्टूबर 2020 से शुरू होगा।




  • स्कूली बच्चों के लिए नवाचार के अंतर्गत लॉकडाउन डायरी विषय पर लॉकडाउन अवधि के अनुभवों को सुलेख के रूप में लिखवाने का निर्णय। इसी तरह ‘पीढ़ियों का ज्ञान’ विषय पर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के घर के वरिष्ठ सदस्य जैसे - दादा-दादी, नाना-नानी, ताऊ-ताई की हिस्सेदारी का निर्णय।




  • आगामी 6 जुलाई से ‘‘हमारा घर-हमारा विद्यालय’’ के अंतर्गत हर घर में स्कूल की घंटी बजाने का निर्णय। कोरोना संकटकाल में विद्यार्थियों की शैक्षिक नियमितता बनाए रखने के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र ने तैयार की योजना। इसके अनुसार विद्यार्थी अब अपने घर में ही विद्यालय के वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे। घर के स्कूल में प्रातः 10 बजे पालक द्वारा घंटी-थाली बजाकर स्कूल प्रारंभ किया जाएगा, इसी प्रकार दोपहर एक बजे घंटी-थाली बजाकर अवकाश किया जाएगा। इससे बच्चों को घर में ही विद्यालय का आभास होगा।




कोविड-19 के खात्मे के अहम निर्णय-




  • प्रत्येक जिले में कोविड संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला क्राइसिस मैनेंजमेंट ग्रुप का गठन का निर्णय।




  • कन्टेनमेंट एरिया की निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी एवं अन्य उपलब्ध आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने का निर्णय।




  • आपातिक स्थितियों में प्रभावी प्रबंधन के लिए मेडिकल और गैर मेडिकल (अत्यावश्यक सेवाएं) विषयों एवं भोजन की व्यवस्था के लिए पृथक-पृथक हेल्प लाइन्स संचालित करने का निर्णय।




  • कोरोना के विरूद्ध IITT (Identification, Isolation, tracing Treatment) फ्रेमवर्क आधारित नवीन रणनीति बनाई गई है।




  • कोरोना पॉजीटिव पाए जाने पर शासकीय अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में सभी वर्गों के निःशुल्क इलाज किये जाने का निर्णय।




  • प्रदेश में मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब्स की संख्या 27 तक पहुंची। टेस्टिंग क्षमता 60 प्रतिदिन से बढ़कर 6000 टेस्ट प्रतिदिन।




  • जीवन अमृत योजना के तहत रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला आयुर्वेदिक काढ़ा ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से घर-घर बांटा गया। डेढ़ करोड़ परिवारों को त्रिकटु काढ़ा बाँटा गया। इसके अलावा 3 करोड़ लोगों को आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक दवाएँ वितरित की गईं।




  • भोपाल एवं इंदौर में नॉन-कोविड मरीजों के लिए ‘‘संजीवनी’’टेली हेल्थ सर्विस लांच करने का निर्णय।




  • डॉक्टर्स घर बैठे भी परामर्श सेवाएं दे सकें, इसके लिए दिनाँक 1 मई 2020 से कोरोना ई-परामर्श सेवा प्रारंभ करने का निर्णय।




  • प्रदेश में सभी जिलों में फीवर क्लीनिक की स्थापना करने का निर्णय।




  • कोविड-19 के रोगियों के प्रबंधन के लिए एम्स नई दिल्ली के क्लीनिकल प्रोटोकॉल के पालन का निर्णय। इसके अंतर्गत एम्स नई दिल्ली द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार मध्यप्रदेश के कोविड-19 के रोगियों का प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। इसमें भर्ती रोगियों को पर्याप्त पेय पदार्थ, संतुलित आहार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए विटामिन ए, डी, सी तथा जिंक की अनुशंसित खुराक प्रदान की जाना है। रोगी प्लस रेट, रेस्पिरेटरी रेट तथा ऑक्सीजन थैरेपी के संबंध में भी विस्तृत तकनीकी निर्देश जारी किये गये हैं। इन रोगियों के स्वास्थ्य लाभ के लिये आवश्यक मनोवैज्ञानिक समर्थन और मनोरंजन की व्यवस्था भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा करने का निर्णय।




  • प्रदेश के संस्थागत क्वारेंटाइन केन्द्रों पर आर्केस्ट्रा, गायन, भजन, कठपुतली, जादू, कव्वाली, मुशायरा, मिमिक्री, हास्य कार्यक्रम जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करने का निर्णय। सभी कार्यक्रमों का संचालन, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों, इसके लिए हर सेंटर पर एक समन्वयक भी नियुक्त करने का निर्णय।




  • प्रदेश के संस्थागत क्वारेंटाइन सेंटर्स पर केबल कनेक्शन सहित टेलीविजन सेट लगाए गए। इनमें फिल्में, गाने आदि देखकर यहां रह रहे लोग मनोरंजन करते रहे। इन केन्द्रों पर इंडोर खेल गतिविधियों का आयोजन किया जा सके इसके लिये खेल साम्रगी की किट देने का निर्णय।




  • प्रति व्यक्ति द्वारा मास्क का उपयोग अनिवार्य करने का निर्णय।




  • राज्य शासन ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए नगरीय क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर थूकना प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया।




  • प्रदेश में 15 दिवसीय ‘‘किल कोरोना’’अभियान संचालित करने का निर्णय। जिसके अंतर्गत ढाई से तीन लाख नागरिकों के सेम्पल लेकर टेस्टिंग का कार्य किया जाएगा।




निर्माण क्षेत्र -




  • प्रदेश में कोविड-19 की स्थितियों में लोक निर्माण विभाग के 4 हजार से अधिक कार्य प्रारंभ करने का निर्णय। इन कार्यों में 20 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदाय। कुल 38 हजार करोड़ से अधिक के कार्यों का प्रदेश में संचालन।




  • पंच-परमेश्वर योजना पुनः प्रारंभ करने का निर्णय। प्रदेश की 22 हजार 811 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 52 हजार से अधिक गाँवों में विकास के लिए योजना के अंतर्गत 14वें वित्त आयोग की 1555 करोड़ की राशि जारी। इस राशि में 75 प्रतिशत राशि नवीन अधोसंरचना के कार्यों, 10 प्रतिशत पेयजल व्यवस्था, 7.5 प्रतिशत संधारण कार्यों और 7.5 प्रतिशत राशि कार्यालयीन व्यय के लिए निर्धारित।




  • कोविड-19 को देखते हुए रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़े प्रभाव को देखते हुए पंजीकृत परियोजनाओं को पंजीयन अवधि में 15 मार्च से 6 माह की छूट प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश की करीब 3 हजार पंजीकृत परियोजनाओं को लाभ।




  • प्रदेश में रेत ठेकों की अवधि बढ़ाने का निर्णय। इस निर्णय का लाभ उन जिला समूहों के रेत ठेकेदारों को प्राप्त होगा जिनके द्वारा 6 जून 2020 तक अनुबंध का निष्पादन कर लिया गया है।




  • कोविड-19 के संक्रमण के कारण प्रदेश में बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों को रोजगार देने के लिए राहत पैकेज के निर्माण कार्यों में रेत खनिज की आपूर्ति के लिए उत्खनन अनुज्ञा के अधिकार कलेक्टरों को देने का निर्णय।




उद्योग क्षेत्र




  • प्रदेश के ऐसे कारखानों जो बिना विद्युत शक्ति से चलित हैं, उन्हें पूर्णतः और जो विद्युत शक्ति से चलित हैं और कम से कम उनमें काम करने वालों की संख्या 50 तक है, उन्हें कारखाना अधिनियम से छूट देने का निर्णय।




  • श्रम अधिनियम में पंजीयन लायसेंस और रिटर्न की ऑनलाइन व्यवस्था का निर्णय। अब पंजीयन और अनुज्ञप्ति एक दिन में प्रदान की जाएगी। लायसेंस की नवीनीकरण की अवधि एक वर्ष के स्थान पर 10 वर्ष की गई।




  • आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 13 केन्द्रीय और 4 राज्य कानूनों में 32 संशोधन करने के साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए 30 सेवाओं को मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम में ला चुका है। श्रम कानूनों में संशोधन के निर्णय से उद्योग और श्रमिक हितों में संतुलन का प्रयास।




  • श्रम विभाग की 18 सेवाओं को 30 दिन के स्थान पर एक दिन में देने का निर्णय।




  • महिला श्रमिकों को समान कार्य के लिए समान वेतन तथा 26 सप्ताह का प्रसूति अवकाश वेतन सहित देने का निर्णय।




सुशासन




  • प्रदेश में मध्यप्रदेश इनोवेशन चैलेंज पोर्टल प्रारंभ करने का निर्णय। पोर्टल के माध्यम से आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों से सुझाव आमंत्रित। प्रदेश के विकास के लिए नई योजनाओं, वर्तमान योजनाओं में सुधार और शासकीय कार्य प्रणाली में सुधार के संबंध में सुझावों को आमंत्रित किया गया।




  • सुशासन के साथ ही कार्यों एवं योजनाओं के स्वरूप में सुधार से संबंधित प्राप्त सुझावों के पश्चात शीघ्र ही मंथन के आयोजन का निर्णय।




पेयजल प्रबंध


प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत वित्त वर्ष में 26 लाख नल कनेक्शन प्रारंभ करने का निर्णय। ग्राम स्तर पर ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति गठित करने का निर्णय। स्थानीय समुदाय द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहयोग से स्थानीय कार्ययोजना बनेंगी जिसकी लागत का 10 प्रतिशत अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत वहन करेंगी। शेष 90 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा दी जाएगी।